शाजापुर में हुआ घमंड और अत्याचार के प्रतीक मामा कंस का वध

शाजापुर में हुआ घमंड और अत्याचार के प्रतीक मामा कंस का वध, 271 वर्षों से मनाई जा रही अनूठी परंपरा
(संदीप गुप्ता )शाजापुर के सोमवारिया बाजार में कंस दशमी पर कंस वध कार्यक्रम का आयोजन हुआ। शहर में 271 वर्षों से यह अनूठी परंपरा चली आ रही है। रात करीब 9 बजे बालवीर हनुमान मंदिर से देव और दानवों का रूप धरे कलाकारों का चल समारोह निकाला गया।
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बालवीर मंदिर से शुरू हुआ चल समारोह सोमवारिया बाजार, मगरिया, बस स्टैंड, नई सडक़, आजाद चौक होते हुए कंस चौराहा पर पहुंचा।
पूरे रास्ते राक्षस बने कलाकार अट्टाहास करते हुए अपने-अपने रथ पर सवार थे, वहीं भगवान श्रीकृष्ण, बलराम, धनसुख, मनसुखा बने कलाकार अपनी मुस्कुराहट से लोगों का मन मोह रहे थे। इस बार कंस वधोत्सव पर नगर में दो स्थानों पर देव-दानवों के बीच वाक्युद्ध हुआ। इसमें आजाद चौक और सोमवारिया बाजार शामिल है। कंस वधोत्सव समिति संयोजक तुलसीराम भावसार, समिति के पदाधिकारी अजय उदासी और संजय शर्मा आदि ने कार्यक्रम में अतिथियों और

गवली समाज के वरिष्ठ जनों का स्वागत सम्मान भी किया।कंस वध के पहले श्री कृष्ण और कंस की सेना के बीच जमकर वाकयुद्ध हुआ। श्रीकृष्ण और कंस के सैनिक के रुप में सजे-धजे कालाकारों ने एक-दूसरे पर तीखे व्यंग बाण चलाए। अरे कन्हैया सुन…करते हैं लूट मार हम सिपाही कंस के…करते हैं भ्रष्टाचार हम सिपाही कंस के…खा जाएंगे तुझे कच्चा और डकार तक नहीं लेंगे…ऐसे खतरनाक हैं हम सिपाही कंस के…। अरे मामा…ग्वालों के पीछे कितने ही लग दिया जाए जोर, किंतु तुझसे ना मारा जाएगा ये माखन चोर। अरे कन्हैया… अब तक तो सोया था मखमल के गदेलों पर…पल भर में तुझे कर दूंगा मिट्टी के ठेलों पर। अरे ओ मामा…हम काल पुरुष है शत्रुंजयी, है काल हमारे हाथों में, अंत तेरा आ गया है अब मत उलझा बातों में। अरे कान्हा…जब हम हमला करेंगे तो सितारे टूट जाएंगे जमीन पर जलजला होगा…रहेगा नाम सिर्फ ‘चाणूर’ का बाकि सब फना होगा। अरे मामाजी…मनमोहन नाम है मेरा, चितचोर भी कहलाता हूं, तलवारों की बातें करते हों, मैं नजर से मार गिराता हूं।
रात 12 बजे हुआ कंस वध
शहर के कंस चौराहे पर रात ठीक 12 बजते ही श्रीकृष्ण बने कलाकार ने कंस के पुतले का पूजन कर उसे मंच से नीचे गिरा दिया। जिसे गवली समाज के लोग लाठी-डंडों से पीटते हुए घसीट कर नई सड़क की ओर ले गए।



