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संस्कृत शिक्षक संघ ने कलेक्टर ज्ञापन सौंपा

संस्कृत शिक्षक संघ ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम का ज्ञापन सोपा

शिक्षकों ने मांग की की संस्कृत भाषा भारतवर्ष की गौरवमयी देव वाणी तथा सभी भाषाओं की जननी है संस्कृत भाषा से प्राचीन काल से ही मानव हितार्थ अपार ज्ञान विज्ञान की धारा प्रवाहित होती रही है। इस भाषा को ऋषि मुनियों द्वारा गहरे ध्यान के बाद इस दुनिया को प्राप्त हुई है यह भाषा दुनिया की सबसे पुरानी उल्लेखित भाषाओं में से एक है संस्कार और नैतिकता तथा कंप्यूटर के लिए पूर्णतः उपयुक्त ज्ञान विज्ञान एवं वैज्ञानिक भाषा हैं। संस्कृत भाषा से रोजगार अपार साधन उपलब्ध हैं एवं विश्व में कई संस्कृत यूनिवर्सिटी से विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं ऐसी महत्वपूर्ण वह गरिमामयी भाषा का आज विद्यालय स्तर पर हनन किया जा रहा है ,आज संस्कृत भाषा के स्थान पर व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देकर हमारे त्रीय भाषा सूत्र की परिभाषा को बदल दिया गया है। जहां पहले बच्चा कक्षा 9वी 10वीं में अनिवार्य रूप से संस्कृत भाषा को पढ़ाता था आज वहां संस्कृत भाषा के स्थान पर व्यावसायिक शिक्षा को दिया जा रहा है शिक्षकों का कहना है कि हम व्यावसायिक शिक्षा के विरोधी नहीं है हम तो चाहते हैं की कक्षा 9वी तथा दसवीं में त्रिभाषा सूत्र के अनुसार सभी बच्चों के लिए संस्कृत भाषा पूर्व के समान अनिवार्य होनी चाहिए तथा कक्षा ग्यारहवीं तथा 12वीं में भी संस्कृत भाषा को एडिशनल विषय के रूप में स्वीकृति प्रदान की जानी चाहिए क्योंकि त्रिभाषा सूत्र का उल्लंघन ना हो नई शिक्षा नीति 2020 में भी बहुभाषिकता की बात की गई है लेकिन व्यावसायिक शिक्षा को इन तीनों भाषा संस्कृत ,हिंदी अंग्रेजी/उर्दू के विरुद्ध जोड़कर बहुभाषिकता का हनन हो रहा है बच्चों के सामने समस्या होती है कि वह कौन सी भाषा का चयन करें और किस भाषा को छोड़े क्योंकि भारत के बच्चे भारतीय भाषा और संस्कार युक्त भाषा उनको उनको पढ़नी चाहिए बच्चे संस्कृत हिंदी को पढ़ना पसंद करते हैं और वर्तमान समय में वहां अंग्रेजी भाषा को भी नहीं छोड़ना चाहते हैं ऐसी स्थिति में बच्चे एवं शिक्षकों के सामने विषय चयन की समस्या आती है अतः शिक्षकों का कहना है कि यदि शासन व्यावसायिक शिक्षा को चलाना चाहते है तो वह छात्र हित में छात्र तब इसे और अधिक उत्साहित हो पाएंगे इसका लाभ ले पाएंगे जबकि व्यावसायिक शिक्षा को एक पृथक विषय के रूप में स्वतंत्र रूप से 1 वर्षीय, दो वर्षीय डिप्लोमा अथवा सर्टिफिकेट प्रचलन में आए ताकि वह अपने बायोडाटा रिज्यूम में अलग से डिप्लोमा या सर्टिफिकेट के रूप में मेंशन कर सकेंगे भाषा शिक्षक चाहते हैं की व्यावसायिक शिक्षा को एक पृथक विषय के रूप में रखें ताकि सभी भारतीय बच्चों के पास तीनों भाषा होना चाहिये ज्ञापन देने वालों में प्रमुख रूप से प्रमोद उपाध्याय संस्कृत प्रकोष्ठ प्रभारी हेमलता अग्रवाल रामकृष्ण गोस्वामी अरुण शर्मा मुकेश बिल्लौ रे अजय शंकर शर्मा सारिका शर्मा संजय वर्मा प्रवीण कुशवाहा जश्रीपाल नीलेश सोनी रीना राजपूत ज्योति राजपूत तारा पटेल ममता पटेल तृप्ति शर्मा अनामिका पारे एवं अन्य संस्कृत शिक्षक एवं सामाजिक संस्कृत अनुरागी उपस्थित थे।

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