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सागर में शरीर से जुड़े हुए बच्चे का मामला!

सागर _बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सागर से एम्स भोपाल दो जुड़वा बच्चियों को लाया गया है। जिनकी पेट और छाती से जुड़ी हैं, वहीं इनका दिल भी एक है। बच्चों का इलाज एम्स में किया जा रहा है। इनकी हालत भी अभी फिलहाल गंभीर बताई जा रही है। इस तरह से जुड़े हुए बच्चों को मेडिकल साइंस में थेरेकोपेगस कहा जाता है। ऐसे ज्यादा मामलों में आधे मृत पैदा होते है। एम्स में आए इस मामले में बच्चे को 24 घंटे से अधिक बीत गए हैं। यदि बच्चे का दिल दोनों शरीर की क्षमता झेल सकता है तो बच्चा बिना सर्जरी के भी जीवित रह सकता है

बच्चों को सफलतापूर्वक सेपरेट होने के लिए पूरे प्रयास भी एम्स में एक्सपर्ट डॉक्टर्स की टीम कर रही है। हालांकि बच्चे का एक ही दिल होने के कारण यह रेयर केस है। डॉ. प्रमोद शर्मा ने बताया कि जिन बच्चों के हार्ट अलग अलग होते हैं, उनमें करीब 40 प्रतिशत बच्चे दुनिया में सर्वाइव करते हैं। बात दें कि

दो तरह के होते हैं कॉन्जाइंड ट्वीन एम्स भोपाल में पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. प्रमोद शर्मा बताते हैं कि कॉन्जाइंड ट्वीन ( शरीर से जुड़े हुए बच्चे) दो तरह के होते हैं। इसमें एक इसमें एक कंपलीट ट्विन होता है जैसे की यह दो बच्चे हैं, जिसमें एक हार्ट है जबकि दो हार्ट होने चाहिए, दूसरा होता है पार्शियल ट्विन जिसमें एक बच्चा पूरा और दूसरा अधूरा होता है। जिसे सेप्रेट किया जाता है, जिसमें दो हार्ट होते हैं।

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